नेताजी सावधान,बिन मौसम खोदी जा रही गोभी

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आजतक खबरें,फरीदाबाद :खाने और खोदने का मौसम जा चूका है।यूं तो गोभी खाने का मौसम जा चूका है फिर भी बेमौसम की फसल पर चुनावी मौसम भारी पड़ता दिखाई दे रहा है।

अगर अपने फरीदाबाद छेत्र के राजनेताओं,सप्पोर्ट व् वोटरों की बात करें तो वो अभी से जाति,धर्म,विकास समस्या व् नीजि स्वार्थ का कीटनाशक लगा उम्मीदवारों के लिए गोभी बो रहे हैं जो कि 12 मई को खोदी जाएगी जो इस संसद चुनाव के उम्मीदवारों का हाजमा खराब कर देगी।

अगर अभी केवल फरीदाबाद की राजनीति की बात की जाये तो यहाँ जाति समीकरण का अहम रोल रहा है।यहाँ नेताओं का जनाधार पार्टी या विचारधारा से अधिक जाति और उपजातिओं पर टिका है।यहाँ जाति की तलवार से चुनावी जंग जितने की पूरी तैयारी की जा रही है।

पहले बात करते हैं चुनावी रण में उतरते ही बाहरी होने का तगमा ले चुके उन नेता जी कि जिन्होंने पहले स्थानिय सरकारी स्कूल व् सरकारी अस्पताल की व्यवस्था को ले कर रोना रोया लेकिन शायद यहाँ के विकास कार्यों को देख नेता जी को जल्द ही समझ आ गया कि विकास के नाम पर उनकी दाल यहाँ गलने वाली नहीं है।

फिर  नवेले पंडित जी ने पासा फैंक दिया अपनी जाति का और अपने ऊपर हुई एक टिप्पड़ीं को पुरे पंडित समाज से जोड़ दिया और पंडित जाति के रहनुमा बनने को निकाल पड़े।लेकिन इस लोकसभा की विधानसभा के पंडित समाज के स्थापित नेताओं के साथ साथ इनकी गठबंधन साथी के जाति वोटर को ये नए नवेले पंडित नेता फूटी आँख नही सुहा रहे इसलिए अब इन्होने नए नवेले पंडित जी के लिए गोभी खोदनी ही है।

अब बात उस उमीदवार की जिनकी पार्टी ने गठबंधन किया अपनी ही विचारधारा की दूसरी राजनीतिक पार्टी से।दोनों राजनीतिक पार्टियां एससी एसटी पिछड़ा वर्ग से संबंध रखती हैं लेकिन उन्होंने यहां फरीदाबाद लोकसभा में अगड़ी जाति के उम्मीदवार को टिकट थमा दिया टिकट देने के शुरुआती दिनों तक तो ठीक था लेकिन जैसे ही एससी एसटी पार्टी ने पिछड़ा वर्ग पार्टी के साथ गठबंधन किया तो अगड़ा जाति उम्मीदवार के वोटर नाराज हो गए क्योंकि यह गठबंधन उस पार्टी के नेता के साथ हुआ था जो खुले मंच से अगड़ी जाति को देख लेने की धमकी देते थे यही कारण है कि इसी पार्टी के  अगड़ी जाति वोटरों ने अंदर ही अंदर अगड़ी जाति के नेता की गोभी खोदनी शुरू कर दी है।

अब बात करते हैं तीसरी पार्टी की,जिसके इलेक्शन की शुरुआत ही गोभी खोदने से हुई।यहाँ पहले टिकट एक जुझारू,कर्मशील युवा नेता को दी गई जिसने पिछले 5 साल से लगातार सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरकर झंडा बुलंद कर रखा था लेकिन गोभी खुदने के कारण इनकी टिकट कट गई।

उनके बाद जिस अनुभवी उम्मीदवार को टिकट दी गयी उनका शुरुआत में ही लोकसभा के संबंधित नेताओं ने विरोध शुरू कर दिया।राजनीति के माहिर खिलाड़ी होने के नाते जल्द ही इस उम्मीदवार ने पार्टी के सभी प्रमुख नेताओं को एक मंच पर इकट्ठा भी कर दिया और घोषणा भी कर दी कि अब सब उनके साथ हैं।लेकिन अंदर की बात यह है कि अगले कुछ महीनों में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं शायद टिकट के फेर में मजबूरी वंश ये नेता एक मंच पर आए हो।मगर खबर यही है कि अंदर ही अंदर इन भावी उम्मीदवारों ने भी वर्तमान उम्मीदवार के लिए भी गोभी खोदनी शुरू कर दी है।

अब बात उस पार्टी के उम्मीदवार की जो लहर के घोड़े पर सवार हो अपनी लोकसभा को नाप रहे हैं।कई जगह विरोध होने के बावजूद वह अपनी जीत को लेकर निश्चित है मगर प्राप्त सूचना व माहौल को देखकर यह दिखाई दे रहा है कि लहर के घोड़े पर सवार इस उम्मीदवार को विरोधियों से ज्यादा अपने पार्टी के विधायक नेताओं को साधने की ज्यादा जरूरत है जिन्होंने उम्मीदवार की गोभी खोदने की तैयारी शुरू कर दी है।

इन सभी उम्मीदवारों को फरीदाबाद से बने तीन बार के सांसद का उदाहरण देखकर समझ लेना चाहिए कि जब अंदर ही अंदर गोभी खुदति है तो अति विश्वास में लड्डू भी बने रखे रह जाते हैं।

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