बल्लबगढ़ का सरकारी स्कूल जहाँ शौच की सोच पर हो जाती है घबराहट

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आजतक खबरें,फरीदाबाद(अमित चौधरी):यह कोई पूर्वोत्तर ग्रामीण क्षेत्र की बस्ती का शौचालय नहीं है,ना ही रेल की पटरी के पास रखा हुआ कोई सरकारी शौचालय जिन्हें देखते ही घबराहट होने लगती है।जहाँ शौच मुक्त होने के लिए अंदर घुसते ही भयंकर बदबू के कारण नाक पर रुमाल रखना पड़ता जहाँ विकसित देश की राजधानी की नाक के नीचे सर्व शिक्षा अभियान “पढ़ेगा भारत बढ़ेगा भारत “,बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओं “,स्वच्छ भारत जैसे अभियान की धज्जियां उड़ती यहाँ दिखाई देती है।

हम बात कर रहे हैं दिल्ली से सटे हुए एनसीआर के उस विकसित शहर फरीदाबाद की जिसका नाम मोदी सरकार की बनाई जाने वाले स्मार्ट सिटी की लिस्ट में शुरुआती दिनों में ही आ गया था।वह फरीदाबाद जिसके उद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्रियों से निकले प्लास्टिक के शौचालय देश-विदेश में डंका बजा रहे हैं।फरीदाबाद बल्लभगढ़ की इस त्रिखा कॉलोनी नामक कॉलोनी को वोट बैंक की दृष्टि से बल्लबगढ़ विधानसभा की सबसे बड़ी कॉलोनी माना जा सकता है।जहाँ विकसित देश की राजधानी की नाक के नीचे सर्व शिक्षा अभियान “पढ़ेगा भारत बढ़ेगा भारत “,बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओं “,स्वच्छ भारत जैसे अभियान की धज्जियां उड़ती यहाँ दिखाई देती है।

बात हो रही है बल्लभगढ़ की तिरखा कॉलोनी के उस सरकारी स्कूल की जहां स्कूल के दरवाजे पर हरियाणा प्रदेश की दो अलग-अलग सरकारों के नाम की पट्टिका सुशोभित हो रही हैं।

हम बात कर रहे हैं उस सरकारी स्कूल की जहाँ शिक्षिका छात्राओं को शौच के लिए जाने से पहले कम से कम 3 बार सोचना पड़ता है क्योंकि जिस शौचालय का वो इस्तेमाल करने वाली हैं उसकी छत ही नहीं है और जो शौचालय के नाम पर चारदीवारी बनाई गई है उस पर भी ताले लगे हुए हैं।साथ ही शौच करने के लिए शिक्षिकाओं-छात्राओं को अपने साथ कम से कम एक अन्य सहयोगी को ले जाना पड़ता है जिसको केवल इसलिए पहरेदारी करनी पड़ती है कि उस तरफ कोई ना आ जाए क्योंकि जिस शौचालय की ओट में शिक्षिका-बच्चियाँ शौच मुक्त होने का प्रयास कर रही हैं उस शौचालय के नाम पर केवल चार दिवारी खड़ी की गई है।उसकी छत बनाई ही नहीं गई और जो चार दिवारी खड़ी की गई है उस पर भी बाहर से ताले लगा दिए गए हैं।

जब आजतक खबरें की टीम मौके पर पहुँची तो पाया कि स्कूल में घुसते ही कूड़े करकट के ढेर लगे हुए हैं।मौके पर कुछ शराबियों का जमघट था तथा जो शौचालय इन दो महिला शिक्षकों तथा छोटे बच्चों के लिए बनाया गया है(जो की आधा अधूरा बना छोड़ा गया है उसकी छत ही नहीं है और जो अधूरा शौचालय बना है)उस पर भी ताला लगा हुआ है।शौचालय के पास एक बक्सा लगा हुआ है जिसमें खुले में बिजली की तारे में मीटर लगे हुए हैं।यहाँ से आस-पड़ोस के पानी की सप्लाई की मोटर व् स्कूल की बिजली की सप्लाई का स्विच है।उसके सभी तार फैले हुए हैं।यहाँ पर कभी भी कोई बड़ी घटना इन छोटे बच्चों के साथ हो सकती है।

कमरों में अँधेरा व् सीलन वाला माहौल है।जिस कारण स्कूल में से ज्यादातर बच्चे नाम कटा कर चले गए और बाकी का भविष्य भी अंधकार में है।

विशेष रूप से बता दें कि इन पढ़ाये जाने कमरों की खिड़की के साथ ही पड़ोसी ने स्कूल की जमीन पर कब्जा करा हुआ है। जहाँ पड़ोसीघर की महिला चूल्हे पर खाना बनातीं है,जिस कारण चूल्हे का धुआँ इस पढाये जाने वाले कमरों में जा कर छोटे छात्रो के लिए घुटन का माहौल बनाता है

सुनहरी किरण संस्था सदस्य सीमा भारद्धाज ने बताया कि उनकी संस्था पिछले कई वर्षों से जिले में शिक्षा व स्वास्थ्य पर कार्य कर रही है।इसी क्रम में के तहत जब सुनहरी किरण संस्था ने तिरखा कॉलोनी में बने राजकीय प्राथमिक पाठशाला का दौरा किया तो  पाया कि पांचवी कक्षा तक चल रहे इस सरकारी स्कूल में अभी केवल दो शिक्षक हैं व् दो कमरों में पांच कक्षायें चल रही हैं।पहली,दूसरी,तीसरी कक्षा एकसाथ पहले कमरे में तथा चौथी,पांचवी कक्षा एकसाथ दूसरे कमरे में लगाई जाती है।

सीमा भारद्धाज ने बताया कि स्कूल के भीतर कॉलोनी की मंडी लगती है जिसके कारण जगह जगह कूड़े के ढेर लगे हैं।एक पार्क भी स्कूल के साथ ही है जिसका रास्ता स्कूल के भीतर से ही है।हाल ही में संस्था की तरफ से इस सरकारी स्कूल की समस्याओं के विषय पर ‘पार्षद दीपक यादव व् जिला मोल्लिक शिक्षा अधिकारी को भी ज्ञापन दिया गया  है।

अन्य सदस्य सुरेंदर शेखावत ने बताया कि यहाँ आय की दृष्टि से कमजोर तबका अधिक है।फिर भी मजदूर वर्ग अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने को मजबूर है।सुरेंदर शेखावत ने बताया कि यह एक ऐसा सरकारी स्कूल है जहां भारत सरकार का शिक्षा अभियान स्वच्छ भारत बेटी पढ़ाओ बेटी पढ़ाओ का नारा फीका पड़ता पड़ता हुआ दिखाई देता है,केवल उन चुनिंदा सरकारी अधिकारियों व भ्रष्ट ठेकेदारों की छोटी मानसिकता के कारण।

सुरेंदर शेखावत ने बताया कि स्कूल के मैदान में ही कॉलोनी के लोग अपने कुत्तों को घुमाते हुए नजर आ जाएंगे।साथ ही शराबी व् आवारा जानवरों का स्कूल के मैदान में घूमना आम दृश्य है।पिछले दिनों इन आवारा कुत्ते के द्धारा 2 छात्रों को काटने की घटना भी हो चुकी है।दोपहर होते ही यह सरकारी स्कूल कॉलोनी की गाड़ियों के पार्किंग स्थल तथा शाम होते ही यहां यह स्कूल का मैदान सब्जी मंडी व अन्य घरेलू वस्तुओं के बाजार में तब्दील हो जाता है।उसके बाद यह सरकारी स्कूल कॉलोनी के शराबियों के लिए मयखाने का काम करता है।

शौचालय के विषय पर सुरेंदर शेखावत बताते है शायद ठेकेदार ने इस शौचालय के निर्माण को कागजों में पूरा दर्शा कर बंदर बांट कर बिल भी पास करा लिया हो।

 बता दें कि इन्ही संस्था साथियों के सहयोग से हाल ही में बल्लबगढ़ विधायक मूलचंद शर्मा के सेक्टर 2 कार्यालय के सामने बने हुए पुराने सरकारी स्कूल का भी कायाकल्प किया है जिसकी बहुत बुरी हालत थी

 

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