बल्लबगढ़ विधायक के फेर में सांसद भी फसे

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आजतक खबरें,फरीदाबाद(अमित चौधरी):यूं तो शिलालेख,इतिहास की कहानी की गवाही वर्षों तक देने के लिए बनाई जाते रहे हैं।किंतु आज के संदर्भ में इन पर नजर डाली जाए तो माजरा कुछ और ही लगता है।

अब तो जनाब एक ही कामयाबी पर कई कई शिलालेख अलग अलग नाम से लिख दिए जाते हैं।इस पर दुख की बात तो यह है कि क्या देश के भीतर से शिलालेख लिख दिए जाने वाले पत्थरों के पहाड़ शायद समाप्त हो गए हैं क्योंकि हरियाणा के बल्लभगढ़ में कुछ नेताओं की उपलब्धि के पत्थर खुद ब खुद टूट कर गिर रहे हैं।

चमत्कारिक बात तो यह है कि पत्थर  उसी स्थान का टूटता है जहाँ पत्थर विधानसभा के प्रिय नेता जी का नाम अंकित होता है।ज्योतषियों की मानें तो यह कहावत सही साबित होती है कि नजर पत्थर को भी तोड़ देती है।

नेता जी की सत्ता के सिहासन को नजर ना लगे पर हालात कुछ ऐसे हैं कि बल्लभगढ़ के प्रिय नेता जी अपने नाम के पत्थरों को अपने ही सामने टूटते देख हमेशा कहते हैं कि “नाम में क्या रखा है,काम करना चाहिए।काम ही गवाही देता है”

राजनीति का बाजार गर्म है।बाजार में चुनावी माहौल है।एक बार फिर टूटी आधारशिला के टूटे पत्थर के संदर्भ में एक मुहावरा निकल कर आया कि कई बार “गेहूं के साथ घुन भी पिस जाता है” कभी-कभी।मगर शायद इस बार तो रजनीति के बाजार में नई कहावत सुनाई दे रही का कि “घुन के साथ गेहूं भी पीस गया”

बल्लबगढ़ के प्रिय विधायक के आधारशिला पत्थरों के साथ हो रही बेदर्दी के ताजा क्रम में अभी तक तो विधायक जी के नाम के पत्थर ही टूट रहे थे।लेकिन इस बार उनकी विधानसभा में लगे एक आधारशिला पत्थर,जिस पर बीच वाले मंत्री नेताजी और लोकसभा के सबसे बड़े नेताजी का नाम भी अंकित था उस पत्थर को भी नजर लग गई।

अब यह तो राम ही जाने यह नजर जनता की है,विपक्षी के किसी नेता की या किसी नए आधार पर नजर न लगने के लिए लगाई जाने वाली नींबू-मिर्च की कमी की

मालूम हो ये उसी गांव के पुल की शिलान्यास पटिका है जहाँ केंद्रीय मंत्रीजी की ननिहाल है व् विधायक जी के भाई की ससुराल है।

बतादे,विधायक के नेतृत्व में बल्लबगढ़ में हो रहे नित नए विकास के दर्जन भर शिलालेख व् आधारशिला पत्थर अब तक टूट या गायब हो चुके हैं।

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