राहुल हुए फेल तो कांग्रेस ने फिर थामा सोनिया का हाथ

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आजतक खबरें नई दिल्ली:गांधी परिवार से इतर मुखिया चुनने की कवायद के बीच कांग्रेस कार्यसमिति ने एक बार फिर सोनिया गांधी के नेतृत्व पर ही भरोसा जताया है। शनिवार को दो दौर में हुई मैराथन बैठकों के बाद 1998 से 2017 तक पार्टी की कमान संभालने वालीं सोनिया को अंतरिम अध्यक्ष चुना गया।

कांग्रेस ने अपने राजनीतिक संकट के सबसे बुरे दौर में एक बार फिर सोनिया गांधी का ‘हाथ’ थाम लिया है।सोनिया गांधी को सर्वसम्मति से कार्यसमिति ने शनिवार देर रात कांग्रेस का अंतरिम अध्यक्ष चुन लिया। राहुल गांधी के इस्तीफे पर दिनभर हुई मैराथन चर्चाओं के दौर के बाद जब कोई दूसरा दमदार चेहरा नहीं मिला तब कांग्रेस ने सोनिया गांधी की रहनुमाई में पार्टी को विकट हालात से उबारने का फैसला लिया।

दिनभर चली बैठक के बाद देर रात राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने बताया कि कार्यसमिति के पांच समूहों की रिपोर्ट और नेताओं से रायशुमारी में सोनिया का नाम ही अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर सामने आया। पहले तो उन्होंने इनकार कर दिया था, मगर वरिष्ठï नेताओं के बेहद आग्रह पर उन्होंने पार्टी की कमान संभालने के लिए हामी भर दी।

कार्यसमिति के इस फैसले से साफ हो गया है कि कांग्रेस मौजूदा हालात में गांधी परिवार से बाहर के नेतृत्व को पार्टी की कमान सौंपने का बड़ा जोखिम लेने के लिए तैयार नहीं हुई।सोनिया गांधी को कार्यसमिति ने भले ही अंतरिम अध्यक्ष चुना है मगर इसमें अब कोई संदेह नहीं कि अगले कुछ समय तक एक बार फिर वह पार्टी का नेतृत्व करती रहेंगी।

बतादें कांग्रेस संविधान के अनुसार कार्यसमिति को केवल अंतरिम अध्यक्ष चुनने का ही अधिकार है। इसीलिए कार्यसमिति ने इसके अनुरूप सर्वसम्मति से सोनिया को अंतरिम अध्यक्ष चुनने के साथ अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के प्लेनरी सत्र में अध्यक्ष के चुनाव का प्रस्ताव भी पारित कर दिया। इस प्रस्ताव का आशय साफ है कि प्लेनरी सत्र की बैठक बुलाकर सोनिया गांधी को कांग्रेस का एक बार फिर पूर्णकालिक अध्यक्ष बना दिया जाएगा।

करीब 20 साल तक सबसे लंबे समय तक कांग्रेस अध्यक्ष पद पर बने रहने का रिकॉर्ड बनाने वाली सोनिया गांधी केवल 20 महीने बाद ही दोबारा इस पद पर लौट आई हैं।

बावजूद इसमें संदेह नहीं कि लोकसभा चुनाव की बेहद करारी शिकस्त और राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद बीते ढाई महीने से असमंजस और हताशा के दौर से अपने सियासी भविष्य को लेकर परेशान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए सोनिया गांधी की वापसी नई संजीवनी से कम नहीं होगी। कार्यसमिति की बैठक के बाद कुछ नेताओं के उम्मीदों से भरे और मुस्कुराते चेहरे इस ओर इशारा भी कर रहे थे।

सोनिया के आने से संकट के इस दौर में पार्टी छोड़कर भागने वाले नेताओं का सिलसिला थमने की उम्मीद की जा रही है। इतना ही नहीं सोनिया गांधी के राजनीतिक कद और उनकी व्यापक स्वीकार्यता को देखते हुए विपक्षी खेमे के कई नेताओं के कांग्रेस के साथ आने और सहयोग करने की संभावनाएं भी कहीं ज्यादा होंगी।ममता बनर्जी सरीखी नेता राहुल गांधी के साथ सियासी साझेदारी करने में हिचकती रहीं हैं मगर सोनिया के साथ उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी।

बतादें कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने बताया कि बैठक में तीन प्रस्ताव पास किए गए। पहला प्रस्ताव यह था कि राहुल गांधी ने पार्टी को शानदार नेतृत्व दिया। उनसे अध्यक्ष पद पर बने रहने की गुजारिश की गई, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। दूसरे प्रस्ताव में कार्यसमिति ने सोनिया से अंतरिम अध्यक्ष बनने की मांग की, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। तीसरा प्रस्ताव जम्मू-कश्मीर को लेकर है, जिसमें राज्य के मौजूदा हालात को लेकर चिंता जताई गई।

राजनीतिक लिहाज से सोनिया गांधी के लिए इस पद पर वापसी बेहद मुश्किल फैसला है। उन्हें अध्यक्ष पद की बागडोर लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी के नेतृत्व की विफलता के बाद पैदा हुई सियासी परिस्थितियों में लेना पड़ा है।हालांकि कांग्रेस के लिहाज से सोनिया गांधी के नेतृत्व की वापसी बेहद सकारात्मक मानी जा रही है।इसमें सबसे अहम बात यह है कि सोनिया गांधी निर्विवाद रूप से इस समय कांग्रेस ही नहीं देश में विपक्ष की सबसे बड़ी नेता हैं।

 

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