“अपना घर” में हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत को सजो रहे डॉ. महासिंह पुनिया

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आजतक खबरें,फरीदाबाद(अमित चौधरी): लोकजीवन में पगड़ी की विशेष महत्ता है।इसका इतिहास हजारों वर्ष पुराना है।पगड़ी जहा एक ओर लोक सास्कृतिक परंपराओं से जुड़ी हुई है,वहीं पर सामाजिक सरोकारों से भी इसका गहरा नाता है।यह कहना हा ३३ वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले में “अपना घर” में हरियाणा के गौरव इतिहास को सजोये डॉ.महासिंह पुनिया का।

पगड़ी के विषय पर सवाल पूछते ही आँखों में चमक व् सीना गर्व से ऊँचा करते हुए डॉ.महासिंह पुनिया ने बताया कि पगड़ी म्हारे हरियाणा की शान व मान-सम्मान काप्रतीक प्रतीक है।जमीनी जानकारी देते हुए डॉ.महासिंह पुनिया ने कहा कि हरियाणा के खादर,बागर,बागड़,अहीरवाल,बृज,मेवात,कौरवी क्षेत्र सभी क्षेत्रों में पगड़ी की विविधता देखने को मिलती है।

पगड़ी हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत है।अगर बात करें प्राचीन काल कि तो योदे, होण, शक, गुप्त, मौर्य, मुग़ल काल तक में पगड़ी बाँधी जाती रही थी।मुगलों के बाद जब ब्रिटिश राज आया तो उन्होंने हैट की प्रथा को चलाया लेकिन फिर भी हरियाणा के लोगों ने अपनी पगड़ी की परम्परा को नहीं छोड़ा।

डॉ.महासिंह पुनिया ने बताया कि सिर को सुरक्षित ढंग से रखने के लिए पगड़ी का प्रयोग किया जाने लगा।पगड़ी को सिर पर धारण किया जाता है। इसलिए इस परिधान को सभी परिधानों में सर्वोच्च स्थान मिला पगड़ी को लोकजीवन में पग, पाग,पग्गड़,पगड़ी,पगमंडासा,साफा,पेचा,फेंटा,खण्डवा,खण्डका आदि नामों से जाना जाता है।जबकि साहित्य में पगड़ी को रूमालियो,परणा,शीशकाय,जालक,मुरैठा,मुकुट,कनटोपा,मदील,मोलिया और चिंदी आदि नामों से जाना जाता है।

वहीं देश विदेश में हरियाणवी नृत्य मे हरियाणा का नेत्रत्व करने वाले फरीदाबाद की शान बन चुके नरेंदर(मोंटी) शर्मा एक महिला पर्यटक को पगड़ी बांधते हुए करते है कि पहले केवल पगड़ी केवल पुरुष समाज की पहचान थी लेकिन अब शायद ये मोदी सरकार का बेटी बचाओ बेटी पढाओ,महिला सशक्तिकरण,समान अधिकार जैसी सोच का ही नतीजा हा कि पिछले कुछ वर्षो से मेले में भी लडकियाँ,महिलाये पर्यटक बहुसंख्या में पकड़ी बंधवा रही है। पगड़ी सूरजकुंड मेले का विशेष आकर्षण केंद्र बन चुकी है।सामान्यतः सर को ढकने की प्रथा लगभग सभी धर्मों में देखने को मिलती है। लेकिन अगर बात करें सनातन संस्कृति की तो युगों युगों से यह प्रथा चली आ रही है।

मोंटी शर्मा ने उत्साह से बताया कि सूरजकुंड मेले के उदघाटन समारोह में बतौर मुख्य अथिति पधारे हरियाणा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों का स्वागत भी पगड़ी से उनके द्धारा पहना कर किया गया था।पगड़ी के सांस्कृतिक इतिहास एवं महत्व को बताते हुए मोंटी शर्मा ने कहा कि इस मेले में पगड़ी लाने का मुख्य उद्देश्य अपनी इस विरासत को युवाओं तक पहुंचाना है।ताकि हमारी आधुनिक पीढ़ी भी अपनी इस परम्परा को जाने और उसे अपनाये।

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