गंगा पुत्र प्राण त्याग पँहुचा गंगा की गोद में

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आजतक खबरें,दिल्ली:“उन्होंने कहा था कि मैं गंगा जी को मरते नहीं देखना चाहता हूं और गंगा को मरते देखने से पहले मैं अपने प्राणों को छोड़ देना चाहता हूं”. उत्तराखंड के ऋषिकेश में जीडी अग्रवाल ने गुरुवार को आखिरी सांसें ली.मंगलवार दोपहर के बाद उन्होंने पानी पीना भी छोड़ दिया था.

जी डी अग्रवाल गंगा की सफ़ाई को लेकर 111 दिनों से अनशन कर रहे थे.86 साल के अग्रवाल 22 जून से अनशन पर थे.वो गंगा में अवैध खनन,बांधों जैसे बड़े निर्माण को रोकने और उसकी सफ़ाई को लेकर लंबे समय से आवाज़ उठाते रहे थे. इसे लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री को इसी साल फरवरी में पत्र भी लिखा था.

उन्होंने पिछले हफ्ते ही ऐलान किया था कि अगर 9 अक्टूबर तक उनकी मांगे नहीं मानी गई तो वो पानी भी त्याग देंगे.फिलहाल तो जीडी अग्रवाल एक संन्यासी का जीवन जी रहे थे.उन्हें स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के नाम से भी जाना जाता था.लेकिन वे आईआईटी में प्रोफेसर रह चुके थे और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य की ज़िम्मेदारी भी उन्होंने निभाई.

क्या चाहते थे प्रोफेसर जीडी अग्रवाल

गंगा की सफ़ाई के लिए कानून बनाने को लेकर जी डी अग्रवाल ने केंद्र सरकार को एक मसौदा भी भेजा था.

उनका कहना था कि केंद्र सरकार के कानून में गंगा की पूरी सफाई का ज़िम्मा सरकारी अधिकारियों को दिया गया है,लेकिन सिर्फ उनके बूते गंगा साफ नहीं हो पाएगी.वो चाहते थे कि गंगा को लेकर जो भी समिति बने उसमें जन सहभागिता हो.लेकिन कहीं ना कहीं केंद्र सरकार और उनके बीच उन मुद्दों पर सहमति नहीं बनी.

सूत्र बताते हैं कि उनके अनशन पर बैठने के बाद केंद्र सरकार ने हरिद्वार के सांसद को उन्हें मनाने के लिए भेजा था.लेकिन अपने साथ जो प्रस्ताव वो लेकर आए थे जी डी अग्रवाल ने उसे स्वीकार नहीं किया.

उनके अनशन के 19वें दिन पुलिस ने उन्हें अनशन की जगह से ज़बरदस्ती हटा दिया था.अपने अनशन से पहले उन्होंने 2 बार प्रधानमंत्री को चिट्ठी भी लिखी लेकिन जवाब नहीं मिला.

बहरहाल,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके निधन पर दुख जताया है.उन्होंने ट्वीट किया, “शिक्षा, पर्यावरण की सुरक्षा, खासकर गंगा सफाई को लेकर उनके जज़्बे को याद किया जाएगा.”

लेकिन उनके ट्वीट पर लोग उनसे जवाब मांग रहे हैं कि जीडी अग्रवाल की मांगें कब मानी जाएंगी.एक ट्वीटर यूज़र मुग्धा ने पूछा है कि क्या नमामी गंगे के लिए दिया गया पैसा इस्तेमाल हुआ?क्या सरकार दिखा सकती है कि गंगा के लिए अभी तक क्या-क्या काम किया गया है?

जीडी अग्रवाल ने पांच साल पहले भी हरिद्वार में आमरण अनशन किया था.उस वक्त तत्कालीन केंद्र सरकार ने उत्तरकाशी में बन रही तीन जल विद्युत परियोजनाओं पर काम बंद कर दिया था.

तब उनको मनाने के लिए कांग्रेस सरकार में केंद्रीय मंत्री रमेश जयराम आए थे और सरकार ने उनकी बात मान ली थी.

बतादेंजी डी अग्रवाल हरिद्वार के मातसदन आश्रम में आमरण अनशन पर थे और उनकी मांग थी कि गंगा, भागीरथी,मंदाकिनी और अलकनंदा पर सभी निर्माणाधीन और प्रस्तावित बांधों पर तत्काल रोक लगा दी जाए.

गौरतलब है कि कुछ वर्ष पहले अग्रवाल के विरोध के बाद ही उत्तरकाशी इलाके की तीन बड़ी परियोजनाओं पर सरकार ने पाबंदी लगा दी थी जिनपर 80 करोड़ रू खर्च हो चुके थे

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