गोद भराई की विलुप्त होती सभ्यता संस्कृति की झलक सरकारी विभाग ने दिखाई गांव में

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आजतक खबरें,फरीदाबाद :एनीमिया का अर्थ है- शरीर में खून की कमी होना।यह तब होता है,जब शरीर के रक्त में लाल कणों या कोशिकाओं के नष्ट होने की दर, उनके निर्माण की दर से अधिक होती है।किशोरावस्था और रजोनिवृत्ति के बीच की आयु में एनीमिया सबसे अधिक होता है।उक्त शब्द आंगनवाड़ी सुपरवाइजर शालू ने गांव प्याला को एनीमिया से मुक्त करने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ग्रामीण की तरफ से आयोजित कार्यक्रम के दौरान उपस्थित गर्भवती महिलाओं,छात्राओं व् ग्रामीण किशोरियों को सम्बोधित करते हुए कहे।

सुपरवाइजर शालू ने कहा कि एनीमिया एक ऐसी समस्या है जिस पर लोग कम ही ध्यान देते हैं.एनीमिया केवल वयस्कों में ही नहीं,बल्कि बच्चों में भी आमतौर पर पाया जाता है।शालू ने बताया कि बढ़ती उम्र के साथ एनीमिया की संभावना भी बढ़ जाती है.भारत में 80 प्रतिशत से अधिक गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं।

वहीं ANM बीना ने बताया कि शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं या हीमोग्लोबिन की कम मात्रा होने पर शरीर के ऑर्गन सिस्टम को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचाते हैं.लाल रक्त कोशिकाओं की कमी से शरीर में खून के जरिए ऑक्सीजन का प्रवाह कम मात्रा में होता है,जिससे लोगों को थकान,त्वचा का पीला पड़ना,सिर में दर्द,दिल की धड़कनों का अनियमित होना और सांस फूलना आदि समस्याएं होने लगती हैं इसके अलावा मूड में बदलाव और चिड़चिड़ापन,कमजोरी आदि समस्याएं भी सामने आती हैं.

बता दें कार्यक्रम के दौरान मौके पर गर्भवती महिलाओं की गोद भराई की रस्म भी की गई।सुपरवाइजर गीता व राजरानी  गर्भवती महिलाओं को शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए जरूरी उपाय बताए।सभी महिलाओं से एनीमिया मुक्त गांव बनाने के लिए संकल्प लिया गया. गांव की महिलाओं ने बड़े हर्सोल्लास के साथ गर्भवती महिला के गोद भराई की रस्म निभाई। गांव की महिला सीमा ने बताया कि गांव में गोद भराई की विलुप्त होती सभ्यता संस्कृति की झलक सरकारी विभाग ने दिखाई।

साथ ही स्वास्थ्य विभाग की ANM बीना व LHV सुदर्शन की मदद लेकर गर्भवती महिलाओं का बीपी,शुगर, हीमोग्लोबिन की जांच कर स्वस्थ रहने की टिप्स दी गयी।

कार्यक्रम में सुपरवाइजर शालू,गीता,राजरानी व दर्जनों महिलाओ ने भाग लिया।

Amit Chaudhary
9891101000

 

 

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