अनुभव बाँट गुदड़ी के लाल तैयार करवा रही हरियाणा की छोरी फरीदाबाद में

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आजतक खबरें,फरीदाबाद(अमित चौधरी):शहर के बच्चे पहलवानी नही कर सकते,वो पहलवान बन राष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम नही कमा सकते जैसे वाक्यों को झुठलाने का अपने जीवन का देह बना चुकी है हरियाणा की यह अर्जुन अवार्डी पहलवान छोरी।

अपने प्रण को पूरा करने के लिए यह अर्जुन अवार्डी महिला पहलवान अपना अनुभव बाँट श्री जगरूप राठी के जरिये,जुनून के साथ छोटे छोटे बच्चों को तराशने के लिए अंतराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं के साथ अकादमी के मेट पर बच्चों संग पसीना बहा रही हैं।

जी हाँ बात हो रही है अर्जुन पुरस्कार विजेता श्री जगरूप राठी की बेटी अर्जुन अवार्डी नेहा राठी की ।

बतादें खुद अर्जुन पुरस्कार विजेता श्री जगरूप राठी वह पिता हैं जिन्होंने अपनी बेटी को पहलवान बनाने की खातिर समाज के लोगों के ताने झेले लेकिन हर वक्त हर मोड़ पर बेटी के साथ खड़े रहे और उसे बुलंदियों तक पहुंचाया।

नेहा को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भारत सरकार ने अर्जुन अवार्ड से नवाजा।नेहा तीन-भाई बहनों में सबसे छोटी थी।बड़े भाई व बहन की बजाय नेहा का रेसलिंग में रुझान था।वह अक्सर अपने पिता अर्जुन अवार्ड से सम्मानित पहलवान जगरूप सिंह राठी को प्रैक्टिस करते देखती तो खुद भी प्रैक्टिस करती।

बेटी के रुझान को देखते हुए उनके पिता जगरूप राठी ने निर्णय लिया कि वह अपनी बेटी को इसी फील्ड में आगे बढ़ाएंगे। लेकिन यह राह इतनी आसान नहीं थी।15-16 साल की उम्र में जब जगरूप बेटी को अखाड़े में लेकर गए तो सब हैरान रह गए।लोगों ने कहा छोरी को थोड़ा पढ़ाओ और हाथ पीले कराओ।कई बार लोगों की बात सुनकर नेहा को बुरा लगता,लेकिन पिता जगतपुर सिंह पीठ थपथपा कर बोलते कि तुम सिर्फ खेल पर ध्यान दो।

पहलवान श्री जगरूप राठी ने खुद अपनी बेटी को पहलवानी के सारे दांव-पेंच सिखाए।वे जब बेटी को अखाड़े ले जाते तो अक्सर लोग कहते कि छोरी अखाड़े में लड़कों संग खेलेगी तो लोग क्या कहेंगे।लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी।उनके इसी संघर्ष व मेहनत की बदाैलत नेहा राठी इंटरनेशनल रेसरल बनीं।

बता दें,आजाद भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार देखने को मिला कि किसी एक खेल में पिता व पुत्री को अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया हो।नेहा राठी के पिता जगरूप राठी को भारत सरकार द्वारा वर्ष 1973-74 में अर्जुन अवार्ड दिया गया था।

नेहा राठी मूलरूप से गांव भापडौदा जिला झज्जर की रहने वाली है, लेकिन उनकी खेलों में आगे बढऩे की जमीन सोनीपत ने ही तैयार की है।सोनीपत के हिंदू गल्र्स कालेज में पढ़ाई के दौरान ही अर्जुन अवार्डी पिता पहलवान जगरूप के प्रोत्साहन से कुश्ती में कदम रखा।

नेहा के पति नीरज कुमार भी खुद एक पहलवान हैं।नेहा लगातार 12 साल नेशनल चैंपियन रहीं।कॉमनवेल्थ गेम्स 2005,2008,2010,2012 में गोल्ड जीता।नेशनल की 33 प्रतियोगिताओं में से 25 में उनके नाम गोल्ड मेडल हैं।

खेलों के साथ पहलवान जगरूप सिंह राठी ने अपनी बेटी नेहा राठी को पढ़ाई में भी आगे बढ़ाया।नेहा राठी इंग्लिश में ग्रेजुएट करने के बाद एमपीएड और डीपीएड किया।इस समय नेहा राठी हरियाणा पुलिस में इंस्पेक्टर पद पर नियुक्त हैं।

बता दें बेटी को एक सफल मुकाम पर पहुंचाने के बाद बाद जगरूप राठी ने शहर की बेटियों पर मेहनत कर उन्हें भी नेहा राठी बना रेसलिंग के छेत्र में एक बड़ी पहचान दिलाने का बीड़ा उठाते हुए शहर में श्री जगरूप राठी अकेडमी की शुरुवात की है जिसमे समय समय पर राष्ट्रीय अंतराष्ट्रीय स्तर के पहलवान अपना अनुभव ट्रैंनिंग लेने वाले बच्चो को देते रहते हैं.

फरीदाबाद में पहली बार एक निजी स्कूल में रेसलिंग अकादमी खोली गई है।

सेक्टर 88 ग्रेटर फरीदाबाद के दिल्ली स्कूलर्स में अर्जुन अवार्ड से सम्मानित रेसलर जगरूप राठी ने श्री जगरूप राठी अकादमी शुरू की है।हरियाणा पुलिस की नौकरी करते हुए नेहा राठी ने अपने जनून को पूरा करने लिए अपने पिता जगरूप राठी का सहयोग करते हुए सुबह शाम श्री जगरूप राठी अकादमी के माध्यम से पहलवानी सीख रही फरीदाबाद की बेटियों के साथ अपना कौशल व् अनुभव बाँट,भविष्य में चमकने वाले इन हीरों को एक जोहरी की तरह तराश रही हैं।

 

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