“हमारी लेट्रिन का पैसा हमारे गांव का सरपंच खा गया”

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आजतक खबरें,फरीदाबाद(अमित चौधरी):पत्रकार होने के नाते आज एक खबर के सिलसिले में पड़ोस के ही ग्रामीण क्षेत्र में जाना हुआ।वहाँ एक बुजुर्ग महिला द्धारा कहे गए एक वाक्य ने सोचने पर विवश कर दिया कि आज हमारी राष्ट्रीय भाषा का क्या हश्र हो गया है।महिला अपने गांव की एक शिकायत बता रही थी।उन्होंने कहा कि……………..   

  “बेटा सरकार से आया हुआ हमारी लेट्रिन का पैसा हमारे गांव का सरपंच खा गया

 

                          हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाये

(साल में एक दिन हिंदी दिवस पर बैनर लगा राष्ट्रीय भाषा को सम्मान देने वालो को समर्पित)

 

 

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