मोदी-शाह के मास्टर स्ट्रोक से विपक्ष हतप्रभ :370-35A

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आजतक खबरें नई दिल्ली :केंद्र की सत्ता में आने के बाद अपने हर फैसले से चौंकने के लिए मजबूर करने वाले पीएम मोदी ने दूसरी बार शपथ लेने के बाद यह सिलसिला जारी रखा है।पहले कार्यकाल में पीएम मोदी ने अचानक नोटबंदी, सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के फैसले की कानों-कान खबर नहीं लगने दी थी। मंत्रिमंडल विस्तार में भी नौकरशाह हरदीप पुरी, केजे अलफांस को शामिल कर हैरान किया था।दूसरी पारी में विदेश सचिव रहे एस जयशंकर को सीधे विदेश मंत्री बना कर तो अब अनुच्छेद 370 और जम्मू-कश्मीर को दो हिस्से में बांट कर सबको चौंकने के लिए मजबूर किया।

थोड़ी देर तक किसी के समझ में कुछ नहीं आया। जब समझ में आया तो पीडीपी के दो सांसदों मीर मोहम्मद फैयान और नजीर अहमद ने पहले कपड़े फाडने शुरू कर दिए। बाद में संविधान की प्रतियां भी फाड़ी।

जम्मू-कश्मीर को लेकर चल रही कयासबाजी के बीच मुख्य चर्चा अनुच्छेद 35-ए खत्म करने के इर्द गिर्द थी। हालांकि सोमवार सुबह 11:02 बजे राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने अनुच्छेद 370 खत्म करने का संकल्प और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पेश किया तो विपक्ष के साथ पूरा देश हक्का-बक्का रह गया।

इस बीच, नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद धरने पर बैठ गए।इन सबसे बेपरवाह शाह अपनी बात रखते गए, हालांकि जबर्दस्त हंगामे के कारण उनकी आवाज सुनाई नहीं दे रही थी।

दरअसल रविवार को शाह की एनएसए डोभाल,गृह सचिव राजीव गॉबा, आईबी और रॉ प्रमुख के साथ मैराथन बैठक, देर रात पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला को नजरबंद करने और सोमवार को कैबिनेट की सुरक्षा समिति की बैठक बुलाने के बाद जम्मू-कश्मीर को लेकर बड़ी घोषणा की संभावना चर्चा में थी।

इससे पहले पर्यटकों को तत्काल वापस बुलाने, कश्मीर घाटी में अर्धसैनिक बलों की ऐतिहासिक उपस्थिति दर्ज कराने के कारण भी अफवाहों का बाजार गर्म था। यहां तक कि पीएम आवास पर हुई कैबिनेट की बैठक के बाद भी किसी को भनक नहीं लगी कि सरकार का निशाना अनुच्छेद 370 है न कि अनुच्छेद 35-ए। रहस्य की परतें अंत समय में तब खुली जब शाह ने अचानक अनुच्छेद 370 खत्म करने संबंधी संकल्प और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पेश किया।

बतौर भाजपा अध्यक्ष सांगठनिक मामलों में अपनी दक्षता का लोहा मनवा चुके गृह मंत्री अमित शाह का सियासी कद मिशन कश्मीर ने बहुत बढ़ा दिया है।गृह मंत्री का पदभार संभालने के बाद से ही शाह ने आतंकवाद और कश्मीर को मुख्य एजेंडे में शामिल किया। पहले गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम संशोधन बिल पर उन्होंने राज्यसभा की मुहर लगवा कर सबको चौंकाया।

अनुच्छेद 370 खत्म करने में सबसे बड़ी भूमिकानिभा कर अपना सियासी कद बड़ा कर लिया।गौरतलब है कि कश्मीर का मुद्दा पूरे देश और खासतौर से भाजपा को सीधे प्रभावित करती रहा है।इससे पहले दो बार सरकार बनने के बावजूद पार्टी और सरकारें कश्मीर के संदर्भ में कुछ नहीं कर पाई थी।

मोदी-शाह की सियासी जोड़ी ने इस मास्टर स्ट्रोक के जरिए न सिर्फ विपक्ष को चारों खाने चित किया, बल्कि चुनावी राज्यों हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र के लिए राष्ट्रवाद की मजबूत जमीन तैयार कर दी। इन तीनों ही राज्यों में इसी साल अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं। तीनों राज्यों में भाजपा की सरकार है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि इस दांव के बाद इन राज्यों में स्थानीय और नेतृत्व का मुद्दा गौण हो जाएगा।

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