नाइजीरियन दूतावास ने चाल्र्स को नहीं माना अपना आदमी

0
89

आजतक खबरें,फरीदाबाद :   ड्रग तस्कर गिरोह को पकडऩे की कार्रवाई के दौरान पुलिस-तस्कर के बीच हुई हाथापायी में गोली लगने से मारे गए चाल्र्स नामक व्यक्ति को नाइजीरियन दूतावास ने अपना नागरिक मानने से इंकार किया है। प्रारंभिक तौर पर नाइजीरियन दूतावास ने स्थानीय पुलिस को चाल्र्स के साथी इहचीकू के बारे में भी दस्तावेजों की जांच के बाद अपना रुख स्पष्ट करने की बात कही है।

उधर, घाना दूतावास को पुलिस कार्रवाई में चाल्र्स की मौत की सूचना शुक्रवार को ही भिजवा दी गई थी। घाना दूतावास से टीम सोमवार को फरीदाबाद आ सकती है। शनिवार शाम को चाल्र्स के शव का पोस्टमार्टम हो गया लेकिन परिचित एक मिनट में लौटकर आने की बात कह शव लिए बगैर कही चले गए।

शव बीके अस्पताल के शवगृह में सुरक्षित रखा है। सूरजकुंड थाना प्रभारी विशाल का कहना है कि नाइजीरियाई दूतावास की टीम शुक्रवार को ही लौट गई थी घाना दूतावास की टीम अभी तक नहीं आई है।

इस प्रकरण में अहम बात यह है कि सुरक्षा एजेंसी इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) की टीम ने घटना का विस्तृत ब्योरा केंद्र सरकार को भेजा है। आईबी ने रिपोर्ट में लिखा है कि ग्रीन फील्ड कॉलोनी में 150 विदेशी नागरिक करीब एक साल से विभिन्न मकानों में किराए पर रह रहे हैं। इनमें से केवल 40 का सत्यापन फरीदाबाद पुलिस के पास है। कईयों के पासपोर्ट वीजा की निर्धारित अवधि निकल चुकी थी लेकिन पुलिस की सिक्योरिटी शाखा ने सी-फार्म के अनुसार भी किसी की जानकारी अपने पास सहेज नहीं रखी थी।

हिस्ट्रीशीट बनाने में जुटी आईबी
आईबी के एसपी चाल्र्स व इहचीकू की ड्रग संलिप्तता को लेकर पुरानी हिस्ट्री खंगाल रही है। हालांकि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में चाल्र्स व इहचीकू के खिलाफ दिल्ली-एनसीआर में कोई भी आपराधिक मुकदमा नहीं मिला है लेकिन वास्तविकता जानने को आईबी बड़ी सक्रियता के साथ कार्य कर रही है। आईबी सूत्रों के मुताबिक ग्रीन फील्ड के अलावा सेक्टर-10, 11 व कई अन्य क्षेत्रों में नाइजीरिया, घाना और अफ्रीका के लोग बड़ी संख्या में रह रहे हैं।

आईबी रिपोर्ट की एक बड़ी बात यह भी है कि फरीदाबाद, गुडग़ांव और दिल्ली में रह रहे कई नाइजीरियन, अफ्रीकियों को फरीदाबाद के कुछ क्राइम ब्रांच अफसर अक्सर पकड़कर छोड़ते रहे हैं। इनसे कई बार ड्रग्स बरामद हुआ लेकिन उन पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई। आईबी को आशंका है कि शुक्रवार रात घटित घटना इसी मॉडस-आपरेंडी का हिस्सा तो नहीं थी।

आईबी की ही रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि दरअसल, पुलिस ड्रग्स से संबंधित मामले को दर्ज करने में हिचकिचाती है। इससे संंबंधित एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया और कोर्ट ट्रायल की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि उससे हर पुलिस कर्मचारी बेहद घबराता है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट
तीन सदस्यीय डॉक्टरों के पैनल ने माइकल चाल्र्स के शव का पोस्टमार्टम किया। दो घंटे पोस्टमार्टम चला। पहले शव का एक्सरे किया। विसरा लेने के लिए आवश्यक अंग कब्जे में लिए। पैनल टीम में से एक डॉक्टर ने बताया कि चाल्र्स को पीठ की तरफ से ही गोली लगी। हृदय के 6 से 9 सेंटीमीटर दायरे में अन्य अंगों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए गोली बाहर निकली। पीएम रिपोर्ट में लिखा है कि गोली संभवतया 9एमएम की हो सकती है, जो बरामद पिस्टल से चल सकती है। छाती से गोली के पार्टिकल्स भी बरामद हुए हैं।

जेब से निकली मादक पदार्थ की पुडिय़ा
पोस्टमार्टम के वक्त जब चिकित्सीय टीम ने चाल्र्स के शरीर से कपड़े अलग किए तो उनकी तलाशी ली गई। तलाशी में पैंट की जेब से मादक पदार्थ की पूडिय़ा बरामद हुई, जो पुलिस को दी गई है। पुलिस इसे मादक पदार्थ बता रही है।

हालांकि इसी के साथ एक और बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है कि जिसे पुलिस ड्रग तस्कर बता रही है, पुलिस ने मौका-ए-वारदात पर उसकी तलाशी क्यों नहीं ली। तलाशी ली थी, तो यह पुडिय़ा क्यों नहीं मिली। महकमे में व्यंग्यात्मक चर्चा होती रही कि घटना के वक्त पुलिस टीम घबरा गई होगी। उन्हें तलाशी की सुध नहीं रही। वे मामले को मैनेज करने में जुट गए होंगे।

LEAVE A REPLY