पर्यावरण सुरक्षा के लिए रद्दी से कागज के लिफाफे तैयार करेगी “सुनहरी किरण संस्था”

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आजतक खबरें,फरीदाबाद:15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को प्लास्टिक से मुक्त करने का संकल्प लिया था और उन्होंने देश को प्लास्टिक से मुक्ती दिलाने के लिए हर एक देशवासी का सहयोग मांगा था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्लास्टिक मुक्त भारत अभियान में शहर की प्रमुख संस्था “सुनहरी किरण संस्था” के सदस्य खेवनहार बनेंगे।संस्था के सदस्य झुग्गी बस्ती में रहने वाली बेरोजगार महिलाओं को स्वावलम्बी बनाते हुए उनके द्धारा पर्यावरण की सुरक्षा के लिए रद्दी से कागज के लिफाफे तैयार करेंगे।तैयार किए गए लिफाफों को उद्योग व्यापार मंडल की सहायता से बाजार में उतारा जाएगा उक्त जानकारी सुनहरी किरण संस्था की सदस्य अनुराधा शर्मा ने दी।

सुनहरी किरण संस्था की तरफ से चलाये जा रहे “चलो पर्यावरण की ओर” की कार्यक्रम सयोंजक अनुराधा शर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री के प्लास्टिक मुक्त अभियान में सुनहरी किरण संस्था के अधिकारियों ने भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है। अनुराधा शर्मा ने बताया कि जिला उद्योग व्यापार मंडल बल्लबगढ़ के पदाधिकारियों ने उनसे संपर्क किया था।अनुराधा शर्मा ने बताया कि उद्योग व्यापार मंडल उन्हें रॉ मैटिरियल,रद्दी उपलब्ध कराएगा।रद्दी से संस्था के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर महिलाएं कागज के लिफाफे तैयार करेंगी जो कि इन महिलाओं के लिए रोजगार का जरिया बनेगा।अनुराधा शर्मा ने बताया कि तैयार लिफाफों को उद्योग व्यापार मंडल के माध्यम से बाजार में उतारा जाएगा।लिफाफों से होने वाली आय को सीध महिलाओं के खाते में डाला जाएगा।

संस्था की अन्य सदस्य सोनू ने बताया कि इस प्रकार के कार्यक्रम से महिलाएं न सिर्फ आत्म निर्भर बनेंगी बल्कि हुनरमंद भी बनेंगी।घर में उनका खाली समय आसानी के साथ कटेगा व् आर्थिक रूप से परिवार का सहयोग कर सकेंगी।

सोनू ने बताया कि कागज के लिफाफे इस्तेमाल से पॉलिथीन से मुक्ति मिलेगी जिससे नालियों में आए दिन अवरोध होने से रास्तों में फैलने वाले कीचड़ कचरे से शहर को निजात मिलेगी।वहीं जमीन को बंजर बनाने वाली इस पॉलिथीन से भूमि पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा और गौ आदि पशुओं को भी खाने में पॉलिथीन के साथ आने से काल के ग्रास बनने से बचाव होगा।

तो वहीं मनीष ने कहा कि प्रकृति के अंधाधुंध दोहन ने हालात ख़राब कर दिया है,हम अपने स्वार्थ में आने वाली पीढ़ी की चिंता नहीं कर रहे हैं।साल-दर-साल बारिश का कम होना, भूजल स्तर कम होना और इसके विपरीत गर्मी की तपन बढ़ते जाना आदि चीजें सीधे-सीधे इसी पर्यावरण से जुड़ी हैं।इसके दृष्टिगोचर होते परिणामों के बाद अब तो हमें चेत ही जाना चाहिए कि यह पर्यावरण हमारे लिए जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी है।

 

 

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