वित मंत्री एवं राष्ट्रपति के रूप में प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल सराहनीय : अनिल रावल

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आजतक खबरें,बल्लभगढ़:पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भारत रत्न प्राप्त होने के सही अधिकारी हैं।उन्होंने पूरा जीवन देश व देशवासियों की सेवा में समर्पित किया।वित मंत्री एवं राष्ट्रपति के रूप में प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल सराहनीय रहा है।उक्त शब्द रावल शिक्षण संस्था के प्रो-चेयरमैन अनिल रावल ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न मिलने पर बधाई देते हुए कहे।

राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा था।जहाँ रावल शिक्षण संस्था के प्रो-चेयरमैन अनिल रावल व रावल इंटरनेशनल स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ सी.वी सिंह ने राजा जी मार्ग स्थित निवास पर प्रणब मुखर्जी को फूलों का गुलदस्ता भेंट कर अपनी शुभकामनाएं व बधाई दी।

रावल शिक्षण संस्था के प्रो-चेयरमैन अनिल रावल ने उत्साह दिखाते हुए बताया कि मैंने अपने पिता से विनम्र और शालीन व्यक्तित्व वाले पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी जी के बारे में बहुत बातें सुनी थी।मुझे आज प्रणब मुखर्जी जी से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करने का जो गौरव प्राप्त हुआ है यह कभी न भूलने वाला पल है।

अनिल रावल ने बताया कि एक शिक्षक के तौर पर शुरुआत करने के बाद प्रणब मुखर्जी राजनीति का एक जाना-माना नाम बन गए।केंद्र की राजनीति में दशकों का सफर तय करने के बाद प्रणब मुखर्जी 5 साल पहले भारत के राष्ट्रपति के तौर पर चुने गए थे।25 जुलाई 2012 को उन्होंने देश के 13वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली थी।

साथ ही शिक्षण संस्था के प्रो-चेयरमैन अनिल रावल ने बताया कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को विद्वता और शालीन व्यक्तित्व के लिए याद किया जाएगा। पहले भी वे कई अहम जिम्मेदारियों को निभा चुके थे।उन्होंने अपने कार्यकाल में लीक से हटकर कई फैसले लिए।साथ ही अनिल रावल ने बताया कि राष्ट्रपति पद के साथ औपचारिक तौर पर लगाए जाने वाले ‘महामहिम’ के उद्बोधन को उन्होंने खत्म करने का निर्णय लिया।औपनिवेशिक काल के ‘हिज एक्सेलेंसी’ या ‘महामहिम’ जैसे आदरसूचक शब्दों को प्रोटोकॉल से हटा दिया गया है।

अनिल रावल ने कहा कि आमतौर पर राष्ट्रपति को भेजी गईं दया याचिकाएं लंबे समय तक लंबित रहती हैं लेकिन प्रणब मुखर्जी कई आतंकवादियों की फांसी की सजा पर तुरंत फैसले लेने के लिए याद किए जाएंगे।मुंबई हमले के दोषी अजमल कसाब और संसद हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी की सजा पर मुहर लगाने में प्रणब मुखर्जी ने बिलकुल भी देर नहीं लगाई।उन्होंने याकूब मेमन की मौत की सजा पर भी मुहर लगाई।

 

 

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