बड़खल से रावण चुनाव मैदान में उतरने को तैयार

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आजतक खबरें,फरीदाबाद :जहाँ एक तरफ अरावली लूटी-पिटी,भ्र्ष्टाचार के सामने बेबस हालत में सिमटी एक कोने से अपने अंधकार भविष्य की चिंता कर सिसकियाँ लेते हुए बड़खल विधानसभा के चुनावी रण को निहार रही है,तो वहीं दूसरे कोने से इसी विधानसभा में हुए अपने अपमान का बदला लेने के लिए लंकेश्वर अपने हथियार पैना कर चुनावी रण में उतरने को तैयार है।

अपने अपमान को याद कर आंखे लाल करते हुए हुए लंकेश्वर ने बताया कि दशहरा मैदान में मैं(रावण),कुंभकरण व मेघनाद के पुतले दहन के लिए तैयार खड़े थे।मंच पर मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय राज्यमंत्री,स्टाइलिश मंत्री,स्थानीय विधायिका  पूर्व सांसद व मीरपुर,उत्तर प्रदेश से विधायक अवतार सिंह भड़ाना मौजूद थेतभी मंच पर अपने संबोधन के दौरान स्टाइलिश  मंत्री ने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि कुछ लोग दशहरा पर्व पर भी राजनीति कर रहे हैं,जोकि गलत है और उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।जब रावण का अहंकार नहीं रहा तो उन लोगों का भी नहीं रहेगा।जनता के हाथ में तीर है और आने वाले समय में वह उन्हें बता देगी।

लंकेश्वर ने आगे बात जारी रखते हुए बताया कि स्टाइलिश मंत्री के बाद स्थानीय विधायिका ने अपने सम्बोधन में कहा कि पिछले चार साल से बड़खल में दशहरा पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है और लोगों को गुंडागर्दी से मुक्ति मिली है।स्थानीय विधायिका के बाद केंद्रीय राज्यमंत्री ने अपना सम्बोधन शुरू किया तो बिना नाम लिए उन्होंने भी स्टाइलिश मंत्री की बातों का जवाब देते हुए कहा कि वे कभी द्वेष की राजनीति नहीं करते हैं।

लंकेश्वर ने आँखों की बोहों को बड़ा करते हुए गुस्से से बताते हुए कहा कि इस दौरान मंच पर ही केंद्रीय राज्यमंत्री और स्टाइलिश मंत्री के बीच नोकझोंक शुरू हो गई।दोनों में नोकझोंक हो रही थी और मै बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक पुतला बन एक तरफ कोने में खड़ा हो ये सब देख सोचता रहा कि वो राजनीति बड़ी थी जिसने मेरी लंका ढहा दी या आज की ये भ्रष्ट व् स्वार्थ की राजनीति।

अंत में परेशान हो  पूरे दशहरा विवाद के बारे में बात करते हुए लंकेश्वर ने बताया कि एनआईटी में दशहरा पर्व मनाने को लेकर विवाद चला आ रहा था।एनआईटी एक स्थित सिद्धपीठ हनुमान मंदिर व धार्मिक एवं सामाजिक संगठन ने दशहरा मनाने को लेकर प्रशासन से अनुमति मांगी थी।मगर दोनों में से किसी को भी अनुमति नहीं मिली।

ये सब बताते हुए लंकेश्वर परेशान हो उठ कर चल दिए और चुनाव में उतरने की तैयारी करने लगे। ।

 

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