150 एकड़ भूमि पर लगेंगे मीठे फलों के बाग

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आजतक खबर,नई दिल्ली :    कुरुक्षेत्र के लोगों को अच्छी गुणवता के साथ मीठे-मीठे फल मुहैया करवाने के लिए जिला बागवानी विभाग ने 150 एकड़ भूमि पर विभिन्न किस्मों के फलों के बाग लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए किसानों को जहां प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं सरकार की तरफ से अमरूद के बाग के लिए प्रथम वर्ष 4600 रुपए और नीबू के बाग के लिए 4800 रुपए की राशि मुहैया करवाई जाएगी। अहम पहलू यह है कि राज्य सरकार ने बागवानी विभाग पर 19 करोड़ 55 लाख 77 हजार रुपए का बजट भी खर्च किया है।

बागवानी विभाग की गतिविधियों को ओर अधिक तेजी से किसानों तक पहुंचाने और युवाओं को बागवानी विभाग की तरफ आकर्षित करने के विशेष प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए उपायुक्त डा. एसएस फुलिया ने पत्रकारों को बताया कि कुरुक्षेत्र में लाडवा, शाहबाद और पिहोवा को डार्क जोन में शामिल किया गया है। इसलिए पानी को बचाने और लोगों को फलों की खेती की तरफ आकर्षित किया जा रहा है। इसके लिए बागवानी विभाग ने 575 एकड़ भूमि पर सूक्ष्म सिंचाई का लक्ष्य निर्धारित किया है।

इसमें से गांव गुमथला गढु में 145 एकड़ भूमि पर सूक्ष्म सिंचाई शुरू कर दी गई है। इस सूक्ष्म सिंचाई पर सरकार की तरफ से 85 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी। इतना ही नहीं बागवानी विभाग की तरफ से करीब 65 एकड़ भूमि पर अमरूद और 65 एकड़ भूमि पर नीम्बू के बाग लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस खेती के लिए भी किसान आर्थिक सहायता मुहैया करवा रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अपने कार्यकाल में 19 करोड़ 55 लाख 77 हजार रुपए का बजट जिला कुरुक्षेत्र की चारों विधानसभा क्षेत्रों बागवानी विभाग पर खर्च किया गया है। इस राशि में से शाहबाद के गांव रामगढ़ में करोड़ों रुपए की लागत से देश का पहला एकीकृत मधुमक्खी पालन केन्द्र स्थापित किया गया है। राज्य सरकार ने नवंबर 2014 से लेकर मई 2018 तक कुरुक्षेत्र के चारों विधानसभा क्षेत्रों में अनेकों योजनाओं को बागवानी विभाग की तरफ से अमलीजामा पहनाने का काम किया।

सरकार ने थानेसर विधानसभा क्षेत्र में 7 करोड़ 11 लाख 55 हजार रुपए, लाडवा विधानसभा क्षेत्र में 3 करोड़ 32 लाख 46 हजार रुपए, शाहबाद विधानसभा क्षेत्र पर 7 करोड़ 41 लाख 25 हजार रुपए तथा पिहोवा विधानसभा क्षेत्र पर 1 करोड़ 70 लाख 51 हजार की राशि बागवानी विभाग की विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं पर खर्च की है।

 

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